कलयुग में नारायण नाम-स्मरण ही कल्याण का मार्ग' - कथा व्यास पं. देवस्य मिश्र*

 'कलयुग में नारायण नाम-स्मरण ही कल्याण का मार्ग' - कथा व्यास पं. देवस्य मिश्र*



*बस्ती, 3 मई 2026।* जनपद के सदर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पोखरभिटवा उमरी मेडिकल कॉलेज रोड स्थित परिसर में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। दूसरे दिन ही कथा पंडाल में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरा वातावरण "राधे-राधे" और शंख-घंटों की ध्वनि से गुंजायमान हो उठा।


कथा के प्रथम दिवस पर सुप्रसिद्ध कथा व्यास पंडित देवस्य मिश्र ने व्यासपीठ से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के महत्व पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। भागवत हमें सिखाती है कि संसार में रहते हुए भी मन को भगवान में कैसे लगाया जाए।


पं. देवस्य मिश्र ने नारद चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि देवर्षि नारद किस प्रकार लोक-कल्याण के लिए तीनों लोकों में भ्रमण करते हैं और भगवान के नाम का प्रचार करते हैं। उन्होंने कहा कि नारद जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा भक्त वही है जो स्वयं तरे और दूसरों को भी तारे। भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता। नारद जी ने राजा दक्ष को भी शापित होकर ज्ञान दिया और भक्त ध्रुव को 5 वर्ष की आयु में ही भगवान से मिला दिया।

कथा व्यास ने कलयुग के आगमन और उसके प्रभावों पर चर्चा करते हुए कहा कि शास्त्रों में वर्णन है कि कलयुग में मनुष्य की आयु, बुद्धि, बल और धर्म सभी क्षीण हो जाएंगे। चारों ओर छल, कपट, लोभ और हिंसा का बोलबाला होगा। ऐसे में मनुष्य के कल्याण का एकमात्र साधन भगवान का नाम-स्मरण ही है।


उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा -  

_"कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा"_  

अर्थात कलयुग में भगवान का नाम ही एकमात्र आधार है। जो मनुष्य श्रद्धा से नाम का स्मरण करता है, वह इस भवसागर से आसानी से पार हो जाता है। सतयुग में तप, त्रेता में यज्ञ, द्वापर में पूजा का महत्व था, लेकिन कलयुग में सिर्फ नाम-जप से ही कल्याण संभव है। इसलिए हर व्यक्ति को उठते-बैठते, सोते-जागते भगवान का नाम लेना चाहिए।


पं. मिश्र ने आगे कहा कि आज का मनुष्य तनाव, बीमारी और अशांति से घिरा है। इसका कारण ईश्वर से दूरी है। जब हम सत्संग में बैठते हैं, कथा सुनते हैं, तो मन को शांति मिलती है। भागवत कथा मन का स्नान है। जैसे शरीर की गंदगी पानी से साफ होती है, वैसे ही मन की गंदगी कथा-श्रवण से धुल जाती है।


 

कथा के बीच-बीच में सुमधुर भजनों की प्रस्तुति हुई। "मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है", "अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं" और "राधे-राधे जपो चले आएंगे बिहारी" जैसे भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर नृत्य किया। पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया।



इस नौ दिवसीय आयोजन के मुख्य यजमान विश्राम चौधरी सपत्नीक मायावती चौधरी ,राजेश चौधरी, सुजीत चौधरी, आदित्य चौधरी, आदर्श चौधरी, हरिश्चंद्र उपाध्याय, पूर्व प्रमुख गोपाल सिंह, जे पी सिंह, नंदलाल चौधरी, मंटू चौधरी, रामचंद्र चौधरी, राजेंद्र मिश्रा, मृत्युंजय उपाध्याय, वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज उपाध्याय, पंडित सभा शंकर, पंडित आदित्य, पंडित राजू समेत सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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