बस्ती पहुंचे जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बयान देते हुए कहा
Basti By line-: जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी की बैठक में कल जो विपक्षी पार्टी के नेताओं चाहे वह कल्याण बनर्जी हो, ए राजा हो, ओवैसी जी हो या शय्यद नासिर हो,अब्दुल्ला साहब हो यह सांसद हैं जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी के सदस्य हैं इनको लगातार 6 महीने से कमेटी में भरपूर बोलने का अवसर मिल रहा है। लेकिन जब जम्मू कश्मीर के मीर वाइज फारूक को हमने बुलाया था जिस तरह से उसे मीटिंग को रोकने की कोशिश कर रहे थे, अशोभनीय आचरण कर रहे थे, संसदीय भाषा का प्रयोग कर रहे थे। सामने आकर झगड़े पर आमादा थे। अगर लोकतंत्र के लिए उनके मन में सम्मान है संविधान में उनकी आस्था है तो यह जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी उसी संविधान के माननीय स्पीकर द्वारा गठित है और उसमें संसदीय मर्यादा है आप इसकी कार्रवाई रोकना क्यों चाहते हैं फिर लगातार इसको विंटर तक रिपोर्ट देनी थी अगर बजट सत्र तक इसकी रिपोर्ट देनी है। कल उसकी बैठक चल रही थी इसके पहले भी किस तरीके से कल्याण बनर्जी जी ने बोतल फेंकने का काम किया था, या आए दिन जब भी आप बैठी होती है सोची समझी रणनीति के तहत वह रिपोर्ट को प्रस्तुत नहीं होने देना चाहते आखिर पूरा देश देख रहा है कि 7 से 8 घंटे इस ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी की बैठक हो रही हम देश के तमाम राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, असम, उड़ीसा, वेस्ट बंगाल,बिहार, यूपी इन राज्यों में गए सैकड़ो स्टेकहोल्डर से मिले, स्टेट के ऑफिशियल गवर्नमेंट से मिले, वक्फ बोर्ड से मिले, माइनॉरिटी कमीशन से मिले , इस्लामिक स्कॉलरशिप मिले, हाई कोर्ट के लॉयर से मिलेज़ फॉर्मर जज से मिले। तो इतना कभी ड्यूरेशन हुआ नहीं था। 36 बैठके हमने दिल्ली में किया 7 से 8 घंटे, लेकिन जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी में जिस तरीके से विपक्ष का आचरण है वह लोकतंत्र पर कुठाराघात है आखिर अगर मैंने कल कोई बैठक की उसकी नोटिस गई उस नोटिस में हमारे जो विटनेस के रूप में आए उनसे क्रॉस एग्जामिनेशन करना था लेकिन मीटिंग शुरू नहीं हुई उसी समय से शोरगुल करनाज़ झगड़ा पर आमादा, हल्ला गुल्ला करना, इसे साफ है कि उनको न भारत की लोकसभा के प्रति आस्था है ना संविधान के प्रति आस्था है मैं तो साफ कहूंगा आखिर उनको अगर कोई विरोध है तो जब इस अमेंडमेंट पर क्लाज बाय क्लाज संशोधन हमने मांगा है तो संशोधन पुट करेंगे उसे पर सहमति बनेगी या असहमति बनेगी वोटिंग से फैसला होगा प्रजातंत्र में आज कोई कानून भी पार्लियामेंट में पास होता है तो बाई वोटिंग होता है ना की हिंसा या बल के आधार पर आप उसको कार्रवाई को रोक देंगे कानून नहीं पास होने देंगे। अगर स्पीकर श्री ओम बिरला जी ने हमको एक मैंडेट दिया है कि हमको बजट सेशन में जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी के रिपोर्ट को प्रस्तुत करना है तो अब कहां वक्त रह गया है 31 तारीख से लोकसभा शुरू होने जा रही है इसलिए हमने बैठक बुलाई थी 24 को कल जिस तरीके से बैठक में किया 27 तरीके से बैठक क्लाज बाय क्लाज होनी है हमने स्पीकर साहब से कहा उन्होंने भी चिट्ठी लिखी है कि आखिर आपने हमें मैंडेट दिया है रिपोर्ट देनी है। नॉर्थ के स्टेट का टूर कर चुके हैं हम यह भी नहीं कोई लगातार बैठकर कर रहे हैं हम इसमें नहीं सहयोग कर रहे हैं खुद वहां झगड़ा कर रहे हैं और उसके बाद हमारे खिलाफ पत्र लिख रहे हैं हमने स्पीकर साहब से कहा कि 27 तारीख को बैठक है फिर उसे बैठक में क्लाज बाई क्लॉज होगा, फिर हमें उसकी सर्कुलेट करना होगा फिर एडॉप्शन होगा यह प्रक्रिया है अगर सरकार एक बेहतरीन कानून के लिए जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी वक्फ का आग्रह किया था अध्यक्ष जी से गठन का, वह चाहती तो कानून पास करा सकती थी। बहुमत की सरकार थी लेकिन पूरे देश के लोगों के साथ चर्चा हो जाए बेहतर सुझाव आ जाए उसके अनुरूप फिर यह कानून पारित किया जाए जब सरकार इस पर पिछले 6 महीने से जेपीसी का आग्रह किया और हम सभी राज्यों में जाकर मिल रहे हैं कोई जल्दी भी नहीं हुई और इस कानून को पूरा सोच समझकर इस वजह से लाने का प्रयास कर रही है पारदर्शी तरीके से जो वक्फ होता है देश का उस वक्फ की प्रॉपर्टी का फायदा गरीब को, मुसलमान को, पसमांदा को, विधवा को, महिलाओं को, बच्चों को मिल सके स्थिति आज क्या है आज वक्फ की प्रॉपर्टी के नाम पर मुतवल्ली बेच रहे कहीं, का कहीं कमर्शियल प्रॉपर्टी हो रही है कहीं मिस यूज हो रहा है, स्कूल यूनिवर्सिटी या मेडिकल कॉलेज तो नहीं बन रहा तो इसको अगर सरकार अमेंडमेंट लेकर आई है तो यह बेहतरी के लिए है और वे लोग जिनका इस वक्फ के साथ संबंध है वक्फ के साथ जिनका इंटरेस्ट है वह यह नही चाहते, वह अफवाह फैला रहे हैं कि कानून पास हो जाएगा तो मस्जिद चला जाएगा कब्रिस्तान चला जाएगा ईदगाह चली जाएगी जबकि ऐसा कुछ नहीं है यह फैलाई जा रहा है इस पर जाकिर नायक तक ने अफवाह फैलाई कि आप लोग इसको डिसएप्रूव करिए ईमेल करिए एक करोड़ लोग ईमेल कर देंगे तो यह कानून नहीं बन पाएगा तो इसके पीछे सोची समझी रणनीति है लेकिन मैं समझता हूं जैसे आर्टिकल 370 व 35 ए को जब प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में गृह मंत्री जी ने प्रस्ताव किया तो उसके पहले लोग कहते थे की खून की नदियां बह जाएंगी, जम्मू कश्मीर की स्थिति ऐसी हो जाएगी। आज वहां पर अमन है शांति है टूरिज्म बढ़ गया और वहां घर-घर झंडा लग रहे हैं भारत के पार्लियामेंट के पास के कानून लागू हो रहे हैं तीन तलाक पर भी पूरे देश में विरोध किया मौलाना ने लेकिन उसका नतीजा क्या हुआ लेकिन आपने देखा कि आज अल्पसंख्यक महिलाएं कितनी सुरक्षित है और उनकी जिंदगी सुरक्षित है ऐसे ही वक्फ का कानून जब पारित होगा तो देश के आम मुसलमान,गरीब बहनों के लिए बच्चों के लिए एक बेहतरीन कानून साबित होगा।