गलैक्सी आई अस्पताल के डाक्टर पर गंभीर आरोप,दर्जन भर मरीजों की फोड़ी आंख

 गलैक्सी आई अस्पताल के डाक्टर पर गंभीर आरोप,दर्जन भर मरीजों की फोड़ी आंख

बस्ती। समझ में नहीं आता कि डाक्टरों को यह क्या होता जा रहा हैं, क्यों कि यह लोग तिजोरी भरने के लिए आयुष्मान के गरीब मरीजों का खून चूस रहे है? क्यों उन्हें अंधा बना दे रहे है? क्यों उनकी जिंदगियों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं? क्यों उनका इलाज स्टोर रुम में किया जा रहा है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जहां लोग डॉक्टर को भगवान मानते हैं वहीं ऐसे डॉक्टरों से कैसे बच पाएंगे? वैसे तो जिले भर के लगभग सभी आयुष्मान के प्राइवेट अस्पतालों में योजना का दुरुपयोग किया जा रहा है, और इसके लिए मरीज काफी हद तक जो पैसे के लालच में बिना बेड वाले अस्पताल को भी लाइसेंस जारी कर रहे है। सीएमओ कार्यालय पर निरंतर आयुष्मान के गरीब मरीजों का खून चूसने वाले अस्पतालों का बचाव करने का आरोप लगता रहा है। कहने का मतलब अगर प्राइवेट अस्पताल वाले गरीबों का भोजन छीन कर अपने परिवार का पेट भर रहे हैं,तो सीएमओ कार्यालय पर भी अगुंली उठेगी,उन्हें भी वही समझा और माना जाएगा, जो आयुष्मान अस्पतालों के डाक्टर और मालिक कर रहे है। कहना गलत नहीं होगा कि मरीजों को लेकर जिन लोगों में सबसे अधिक संवेदशीलता होनी चाहिए वही संवेदहीन होते जा रहे है। बस्ती के अँखफोड़वा कांड ने पूरे देश हिलाकर रख दिया, भले ही इसकी संवेदनशीलता को प्रशासन और सीएमओ ने संज्ञान लेकर कार्यावाही किया है, लेकिन इस कांड से सभी लोग अंचभित और आश्चर्यजनक है,और कह रहे हैं, कि आवास विकास कालोनी में इनका गलैक्सी आई प्राइवेट अस्पताल,

यह अब तक एक दर्जन से अधिक बुजर्ग मरीजों की रोशनी छीन चुकें,मरीजों की रही सही रोशनी भी डाक्टर ने छीन लिये,जिसे मरीज अपना भगवान मानता है। जिसने भी सुना उसके होश उड़ गए। बहरहाल,मीडिया में खबर आने के बाद बस्ती से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक के लोग सतर्क हो गए। मीडिया निरंतर प्रशासन और सीएमओ कार्यालय यह बताती आ रही हैं,कि आयुष्मान के अस्पताल एवं मरीजों का हर तरह से पोषण कर रही है,उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है, उन्हें कड़ाके की ठंड में जमीन पर लेटाया जा रहा है,उनका इलाज स्टोर रुम में किया जा रहा,उन्हें भोजन और दवांए तक नहीं दी जा रही है। हडडी के आपरेशन में इम्पलांट लगाने के नाम पर धन की उगाही की जा रही है। लेकिन कोई सुनने वाला नहीं। जिसका नतीजा गलैक्सी आई अस्पताल के डाक्टर और मालिक पवन मिश्र के लापरवाही से एक दर्जन से अधिक बुजुर्ग की आंख ही फोड़ डाली। जिले और प्रदेश के लिए इससे बड़ा हादसा और कोई नहीं हो सकता। चिकित्सा क्षेत्र.से जुड़े लोगो का दावा है,कि पांच से दस फीसद आयुष्मान के प्राइवेट अस्पताल मरीजों को अनुमन्य सुविधाएं दे रही है। यह देखना सीएमओ कार्यालय की जिम्मेदारी है। सवाल उठ रहा है,कि अगर मरीजों को भोजन नहीं मिल रहा है,तो कौन इसका जिम्मेदार,अगर इसी अस्पताल में मरीजों का इलाज स्टोर रुम में हो रहा है,तो कौन इसका जिम्मेदार? और अगर हास्पिटल में आंख के मरीजों को इस कड़ाके के ठंड में जमीन पर लेटाया जा रहा है,तो इसका जिम्मेदार कौन? और अगर गलैक्सी में एक दर्जन गरीब मरीजों की आंख फोड़ दी जाती है,तो इसका कौन जिम्मेदार? अगर सीएमओ कार्यालय अपनी जिम्मेदारी से भागेगे तो अंखफोडवा कांड होना लाजिमी है। पूरा प्रशासन और सीएमओ कार्यालय मिलकर भी आयुष्मान के अस्पतालों में जब मरीजों को मिलने वाली सुविधा का बैनर/बोर्ड तक नहीं लगवा सकते तो ऐसे प्रशासन के होने और ना होने से क्या फायदा? ऐसे सीएमओ कार्यालय के होने और ना होने से क्या लाभ ?

Previous Post Next Post

نموذج الاتصال